यहाँ नक्षत्रों के अधिदेवता (Presiding Deity) और उनके लिए हवन/शांति हेतु निर्दिष्ट द्रव्य की सूची दी गई है—
🌌 27 नक्षत्र – अधिदेवता एवं हवन द्रव्य
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अश्विनी – अश्विनी कुमार – घी, जौ
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भरणी – यमराज – तिल, काला वस्त्र
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कृत्तिका – अग्निदेव – गीली लकड़ी, घृत, गुड़
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रोहिणी – ब्रह्मा – दूध, चावल
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मृगशिरा – सोम (चन्द्रमा) – चावल, दुग्ध
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आर्द्रा – रुद्र – तिल तेल, नीम, बेल पत्र
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पुनर्वसु – अदिति – सात प्रकार के अनाज
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पुष्य – बृहस्पति – चना, घी, पीला वस्त्र
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आश्रेषा – सर्प (नाग) – कुश, दारु, नागकेसर
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मघा – पितर – तिल, कुश, जल अर्पण
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पूर्वा फाल्गुनी – भाग देव – गुड़, गन्ना, पुष्प
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उत्तरा फाल्गुनी – अर्यमन – गंध, पुष्प, वस्त्र
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हस्त – आदित्य – चावल, सफेद पुष्प, जल
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चित्रा – त्वष्टा – कमल, चंदन, धूप
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स्वाति – वायु देव – धूप, अगरु, चंदन
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विशाखा – इन्द्र-अग्नि – जौ, धान्य, मधु
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अनुराधा – मित्र देव – पुष्प, गुड़, कुमकुम
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ज्येष्ठा – इन्द्राणी – बेल पत्र, कर्पूर, लाल पुष्प
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मूल – निरृति – काली तिल, नीम, पीपल पत्ते
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पूर्वाषाढ़ा – अप देवता (जल) – नारियल, जल, शंख ध्वनि
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उत्तराषाढ़ा – विश्वदेव – सप्तधान्य, दूध, फल
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श्रवण – विष्णु – तुलसी, दूध, पीले पुष्प
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धनिष्ठा – अष्ट वसु – शंख, फल, अन्न
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शतभिषा – वरुण – जल, कमल, शंख
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पूर्वाभाद्रपद – अजएकपाद – काला तिल, नीम पत्ता
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उत्तराभाद्रपद – अहिर्बुध्न्य – कुश, जल, तिल
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रेवती – पूषा – दूध, घी, शहद
👉 किसी भी रोग-व्याधि निवारण हेतु यह देखा जाता है कि रोग किस नक्षत्र व किस चरण में उत्पन्न हुआ है। उसी नक्षत्र के अधिदेवता और स्वामी ग्रह के मंत्रों के साथ उपयुक्त द्रव्य से हवन करने पर रोग/कष्ट की शांति होती है।